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पुरानी पेंशन स्कीम पर आया बड़ा अपडेट, क्या फिर से बहाल होगी OPS? सरकार ने संसद में दिया जवाब : Old Pension Scheme Latest News

संसद के बजट सत्र के दौरान पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme - OPS) की बहाली को लेकर सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय ने एक लिखित जवाब में बताया कि क्या केंद्रीय कर्मचारियों के लिए **OPS** को दोबारा लागू किया जाएगा या नहीं। सरकार ने इसके विकल्प के रूप में **यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)** और गारंटीड रिटर्न पर जोर दिया है। जानिए सरकार का फाइनल फैसला।

Government Reply in Parliament on OPS (संसद में जवाब)

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार का पुरानी पेंशन योजना (OPS) को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का कोई विचार नहीं है। सरकार का तर्क है कि ओपीएस से सरकारी खजाने पर अनियंत्रित वित्तीय बोझ बढ़ता है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक रूप से सही नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह भी माना है कि एनपीएस (NPS) में सुधार की आवश्यकता थी, जिसे 'सुनिश्चित पेंशन' के जरिए पूरा किया जा रहा है।

What is Unified Pension Scheme (UPS)? (नया विकल्प)

ओपीएस की मांग को शांत करने के लिए सरकार ने **यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)** का प्रस्ताव रखा है, जिसे कई कर्मचारी संगठनों ने स्वीकार भी कर लिया है। 2026 में लागू होने वाली इस व्यवस्था के तहत, एनपीएस और ओपीएस के बीच का रास्ता निकाला गया है। इसमें कर्मचारियों को बाजार के जोखिमों से बचाया जाएगा।

  • सेवानिवृत्ति पर अंतिम वेतन (Last Drawn Salary) का **50% पेंशन** के रूप में सुनिश्चित (Guaranteed) मिलेगा।
  • महंगाई राहत (DR) का प्रावधान भी शामिल है।
  • कर्मचारी का योगदान (10%) जारी रहेगा, लेकिन सरकार अपना योगदान बढ़ाकर **18.5%** करेगी।

Why Government Rejected OPS? (OPS क्यों नहीं?)

सरकार ने संसद में सोमनाथन कमेटी (Somanathan Committee) की रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, ओपीएस एक 'अनफंडेड' (Unfunded) लायबिलिटी है, यानी इसके लिए पहले से पैसा जमा नहीं होता। भविष्य में टैक्सपेयर्स के पैसों से ही पेंशन देनी पड़ती है। सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के बजट को पेंशन में खर्च करने से देश की प्रगति रुक सकती है, इसलिए 'कंट्रीब्यूटरी पेंशन' (NPS/UPS) ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान है।

OPS vs NPS vs UPS Comparison (अंतर क्या है?)

कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि उन्हें अब क्या मिलेगा। ओपीएस में जीपीएफ (GPF) और बिना योगदान की पेंशन थी। एनपीएस पूरी तरह बाजार पर आधारित थी। जबकि यूपीएस (UPS) इन दोनों का मिश्रण है:

  • **OPS:** कोई योगदान नहीं, अंतिम वेतन की 50% पेंशन।
  • **NPS:** 10% योगदान, पेंशन बाजार के रिटर्न पर निर्भर (कोई गारंटी नहीं)।
  • **UPS:** 10% योगदान, लेकिन सरकार द्वारा 50% पेंशन की लिखित गारंटी।

State Governments and OPS Issue (राज्यों का पेंच)

संसद में यह भी बताया गया कि जिन राज्य सरकारों (जैसे हिमाचल प्रदेश, राजस्थान आदि) ने ओपीएस को फिर से लागू किया है, उन्होंने पीएफआरडीए (PFRDA) से एनपीएस का जमा पैसा वापस मांगा था। केंद्र सरकार ने नियमों का हवाला देते हुए वह पैसा लौटाने से साफ इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि राज्य सरकारें अपने दम पर ही ओपीएस का बोझ उठाएंगी, केंद्र इसमें कोई मदद नहीं करेगा।

Employee Unions Reaction (कर्मचारियों का रुख)

सरकार के इस जवाब से कुछ कर्मचारी संगठन संतुष्ट हैं, जबकि कुछ अब भी 'नो कंट्रीब्यूशन' (बिना योगदान) वाली पुरानी पेंशन पर अड़े हैं। ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (JCM) का कहना है कि 50% की गारंटी एक बड़ी जीत है, लेकिन कर्मचारी अपनी सैलरी से 10% कटवाने के पक्ष में नहीं हैं। आने वाले दिनों में इस पर और चर्चा होने की संभावना है।

क्या आप सरकार द्वारा प्रस्तावित 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (UPS) से खुश हैं या आपको सिर्फ पुरानी ओपीएस ही चाहिए? अपनी राय कमेंट में लिखें।

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